
शिव पुराण अध्याय 47 में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के अत्यंत मंगलमय प्रसंग का वर्णन है। गिरिराज हिमालय वैदिक विधि से विवाह की तैयारियां पूर्ण करते हैं और माता पार्वती का सुंदर वस्त्रों एवं रत्नजड़ित आभूषणों से श्रृंगार किया जाता है।लग्न का शुभ समय आने पर भगवान शिव नंदी पर सवार होकर देवताओं, ऋषि-मुनियों और अपने गणों के साथ विवाह मंडप में पहुंचते हैं। माता मैना भगवान शिव की आरती उतारकर उनका स्वागत और पूजन करती हैं।इसके बाद विवाह वेदी पर माता पार्वती दही, अक्षत, कुश और जल से भगवान शिव का पूजन करती हैं। फिर महादेव भी अपनी होने वाली वधू देवी पार्वती का पूजन करते हैं। वर-वधू के एक-दूसरे का पूजन करने के बाद शिव और पार्वती विवाह वेदी पर विराजमान होते हैं और लक्ष्मी आदि देवियां उनकी आरती उतारती हैं।शिव-पार्वती विवाह के इस दिव्य और मंगलमय प्रसंग को सुनें और भगवान शिव एवं माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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